Tuesday, 28 April 2015

बदली के संग चन्दा निकला आसमान में घूमने 
श्वेत चाँदनी के वस्त्रो को लगे सितारे चूमने 
     नदिया के निश्चल जल को, आइना चाँद बनाता है 
     कैसा दिखता हूँ मैं  खुद से, लगा प्रश्न वो पूछने 
बूंदो ने फूलो का उपवन नहलाया ,पथ साफ किया 
देख बगीचा फूलों का, चन्दा लगा खुशबुएँ सूंघने 
      नृत्य कर  रही कलियाँ ,पवन के झोंके गीत गा रहे हैं 
      चंहु ओर खुशहाली देखी, चाँद  लगा   अब   झूमने 
              पर 
जब पहुंचा नेपाल आसुंओ को ना चंदा रोक सका 
वँहा मोत के साये  हैं , चन्दा  लगा जिन्दगी ढ़ूढ़ने 
                                                    शालिनी शर्मा 
      

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