Monday, 6 October 2014

MERA ANTIM SAFAR



                 गीत 

 मेरा अन्तिम सफर शुरू होने को है 

सब आये मगर ना आया है तू 

अर्थी कांधे  उठा ली है सबने मेरी

रुकना चाँहू भी तो मैं कैसे रुकूँ 
सब आये मगर ना ------------------                                               
मेरे  प्यार की कदर तूने जानी नही 
सबने कहा बेवफा मैंने मानी नही 
अब हकीकत समझ मैं कैसे सम्भलूँ 
सब आये मगर ना -------------------
-तुझको इल्जाम देने से क्या फायदा 
तुझको पता ही नही उल्फत का कायदा 
पर तेरी बेरुखी मैं कैसे सहूँ 
 सब आये मगर ना -------------------
तू रूसवा ना हो बस दुआ है यही 
मैं तेरी आरजू ले जहां से चली 
तू खुश रह रहूँ मैं रहूं ना रहूं 
सब आये मगर ना --------------------
मेरा जनाजा है तेरे घर के आगे अभी 
मुझको अन्तिम विदाई दे ना मिलूंगी कभी 
आ द्वारे पे आ मैं कैसे कहूँ 

सब आये मगर ना ------------------
                            शालिनी शर्मा 

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