Thursday, 25 September 2014

MUFLISI

दो जून की रोटी मिल ना सकी 
अंदर पानी के घूँट गये 
आंधी बारिश ऐसी आयी 
मिटटी के घड़े भी फूट गये 
     तकदीर के आंसू पी पी के
     आँखों के आँसू सूख गये
     किस्मत का ताला खुल ना सका 
     कंहा तुम प्रयास में चूक गये 
खामोश हुए तुम ऐसे जैसे 
शब्द जुबां से रूठ गये 
तन्हा तन्हा जीना सीखा 
तो सब कष्टो से छूट गये 
      वो हमदम थे हमराज तेरे 
      जो सब कुछ तेरा लूट गये 
      कोई कैसे धैर्य दिलायेगा 
      जब तुम अन्दर से टूट गये 
                    शालिनी शर्मा 
                            गाजियाबाद 

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