दो जून की रोटी मिल ना सकी
अंदर पानी के घूँट गये
आंधी बारिश ऐसी आयी
मिटटी के घड़े भी फूट गये
तकदीर के आंसू पी पी के
आँखों के आँसू सूख गये
किस्मत का ताला खुल ना सका
कंहा तुम प्रयास में चूक गये
खामोश हुए तुम ऐसे जैसे
शब्द जुबां से रूठ गये
तन्हा तन्हा जीना सीखा
तो सब कष्टो से छूट गये
वो हमदम थे हमराज तेरे
जो सब कुछ तेरा लूट गये
कोई कैसे धैर्य दिलायेगा
जब तुम अन्दर से टूट गये
शालिनी शर्मा
गाजियाबाद
अंदर पानी के घूँट गये
आंधी बारिश ऐसी आयी
मिटटी के घड़े भी फूट गये
तकदीर के आंसू पी पी के
आँखों के आँसू सूख गये
किस्मत का ताला खुल ना सका
कंहा तुम प्रयास में चूक गये
खामोश हुए तुम ऐसे जैसे
शब्द जुबां से रूठ गये
तन्हा तन्हा जीना सीखा
तो सब कष्टो से छूट गये
वो हमदम थे हमराज तेरे
जो सब कुछ तेरा लूट गये
कोई कैसे धैर्य दिलायेगा
जब तुम अन्दर से टूट गये
शालिनी शर्मा
गाजियाबाद
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