"न पाने की ख़ुशी है कुछ, न खोने का ही कुछ ग़म है
ये दौलत और शोहरत सिर्फ कुछ ज़ख्मों का मरहम हैं
अजब सी कश्मकश है रोज़ जीने रोज़ मरने में
मुक़म्मल ज़िन्दगी तो है, मगर पूरी से कुछ कम है"
KUMAR VISHVASH
Friday, 24 April 2015
SUVICHAR
धैर्य धरो , धीरज धरो , कहो विनम्र हो बात संयम ,कौशल ,श्रम ,विवेक ,गहने चरित्र के सात शालिनी शर्मा
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